दीपावली पर निबंध |दीपावली क्यों मनाते हैं | दीपावली कैसे मनाएं

Essay on deepawali in hindi | दीपावली पर निबंध


दीपावली दीपों का त्योहार कहलाता है । हर साल कार्तिक मास के पूर्णिमा तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है । भारत एक त्योहारों का देश है । यहां हर वर्ष भिन्न भिन्न त्योहार मनाते हैं जिसमें से दीपावली एक त्योहार है । दीपावली से संबंधित बहुत से मान्यताएं प्रचलित हैं पर सबका अपना अपना मानना है कि दीपावली त्योहार किस मान्यता के कारण मनाया जाता है । भारतवर्ष में अधिकतर लोगों का विश्वास श्री राम प्रभु जी पर है । जैसा कि आप सभी जानते हैं भारत एक धार्मिक देश है और यहां विभिन्न देवी देवताओं को माना एवं पूजा जाता है । श्रीराम चंद्र जी को हिन्दुओं का भगवान माना जाता है और दीपावली का त्योहार मनाने से संबंधित सबसे प्रचलित मान्यता श्री रामचन्द्र जी से ही संबंधित है ।

दीपावली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है -


दीपावली हर्ष और उत्साह का त्योहार है और दीपावली का त्योहार जैसे ही नजदीक आती है तो लोग इसे सेलिब्रेट करने के लिए अपने घरों की साफ़ सफाई और लीपाई पोताई कुछ महीनों पहले से ही प्रारंभ कर दिया जाता है । घरों की साफ सफाई की जाती है । घरों में नए सामान लाए जाते हैं । हिन्दू धर्म के मान्यता के अनुसार दीपावली का अवसर बहुत ही सुबह माना जाता है इस दिन नए सामान और सोने चांदी की समान खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है । पूरे परिवार के लोगों के लिए नए नए कपड़े खरीदे जाते हैं । मोटर - वाहनों का भी खरीदारी दीपावली के अवसर में भी बहुत किया जाता है ।
धनतेरस के दिन को खरीददारी का सबसे शुभ अवसर माना जाता है । दीपावली के दिन माता लक्ष्मी और श्री राम प्रभु की पूजा की जाती है । लक्ष्मी माता को धन की देवी कहा जाता है लोग इनकी पूजा करते हैं ताकि माता की कृपा अनपर बनी रहे और धन लाभ उन्हें होता रहे ।इस दिन भगवान श्री रामचंद्र जी की पूजा की जाती है क्योंकि मान्यता है कि भगवान श्री राम 14 वर्ष के वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे ।इस दिन सभी घरों को दीपों और छोटे - छोटे रंग बिरंगे बल्बो से गांव शहरों को सजाया जाता है । चारो ओर रोशनी ही रोशनी होती है । यह त्योहार केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मनाया जाता है । सभी घर दीपों एवं छोटे बल्बो की रोशनी से प्रफुल्लित हो उठती है ।दीपावली के त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की जीत का त्योहार भी कहा जाता है ।तभी तो इस दिन अंधकार को दूर करने के लिए सभी घरों को रोशन किया जाता है ।
दीपावली की त्योहार में आतिशबाजी किया जाता है जिससे पूरा आकाश रंग बिरंगे पठाकों से चमक उठता है । इसे श्री राम चन्द्र के 14 वर्ष वनवास से आयोध्या लौटने की खुशी में किया जाता है । इस दिन तरह तरह की मिठाई बांटी जाती है लोग एक दूसरे को सारे गम भूलकर दीपावली की शुभकामना देते हैं । दीपावली के आहट आते ही सभी बाजार रंग बिरंगे दीपों से सज जाते हैं , तरह तरह की रंगीन बल्ब सभी गली ,चौराहे मे लग जाती है सब को देखकर हृदय प्रफुल्लित हो उठती है ।

दीपावली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है -


दीपावली का त्यौहार मनाने से संबंधित बहुत से मान्यता प्रचलित है जिसमें सबसे ज्यादा प्रचलित मान्यता रामायण से संबंधित है । श्री राम प्रभु जी का जन्म आयोध्या में हुआ था । उनके पिता का नाम राजा दशरथ था । राजा दशरथ के चार पुत्र थे - राम ,लखन (लक्ष्मण ) ,भरत ,सत्रुघन तथा राज दशरथ की तीन पत्नियां थी जिसमे से एक थी कैकेयी और अन्य दो सुमित्रा और कौशल्या थी । रानी कैकेयी की एक दासी थी मंथरा जो एक कुशल राजनतिज्ञ थी । जब राजा दशरथ देवों के साथ मिलकर अशुरों के विरूद्ध युद्ध कर रहे थे तो उनका रथ एक जगह फंस गया था । तभी किसी ने अनपर वार कर दिया जिससे वे घायल हो गए । उनकी रथ की सारथी स्वयं कैकेयी थी जिसने चतुराई दिखाते हुए राजा को सुरक्षित स्थान पर लेकर उनका उपचार किया । जब राजा को होश आया तो उनके जान बचाने के लिए रानी कैकेयी पर वो बहुत खुश थे उन्होंने उनसे 2 इच्छाएं पूछी पर तब महारानी ने कुछ नहीं कहा ।
राजा दशरथ ने पहले ही कह दिया था कि जब श्री राम प्रभु जी का शादी होता है उसके तुरंत बाद ही उनका राज्याभिषेक होगा । पर दासी मंथरा इसपर रानी कैकेयी को भड़काने लगी कि अगर राम का राज्ाभिषेक हो जाता है तो भविष्य में उनका और उनके पुत्र का कुछ भला नहीं होगा । रानी कुछ दिन बाद इस बात को याद करके उनसे अपनी दो इच्छाएं प्रकट करना चाहि । दशरथ राजी हो गए । रानी ने पहली इच्छा में भरत को राजा और दूसरे में श्री राम प्रभु जी को 14 वर्ष का वनवास मांग ली । राजा दशरथ ने उन्हें बहुत मनाने की कोशिश की पर वो एक नहीं मानी । श्ीरामचन्द्र जी कुल की मर्यादा रखने के लिए राजा दशरथ को मान जाने को कहा । राजा दशरथ मान तो गए पर उनको इसपर बड़ा सदमा लगा । श्री राम प्रभु और उनकी पत्नी सीता को सन्याशी वस्त्र दे दिया गया । लक्ष्मण भी उनके साथ जाने की जिद किया और जाने के लिए तैयार हो गया ।
जब राम , लक्ष्मण और माते सीता वनवास के लिए जा रहे थे तब पूरे अयोध्यावासी उनके साथ जाने को तैयार हो गए थे पर उन्होंने सबको रोका । वनवास के दौरान रावण माता सीता का अपहरण करके ले गया । श्री राम प्रभु , अपने परम भक्त हनुमान और वानर सेना और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ मिलकर लंका में आक्रमण किया और रावण का वध किया । इस दिन को हरसाल दशहरा त्योहार के रूप मनाया जाता है । माते सीता को जब मुक्त कर , राम ,लक्ष्मण , माते सीता और हनुमान आयोध्या 14 वर्ष वनवास काटकर लौटे तब श्री राम प्रभु के वापस आने के खुशी में पूरे आयोध्या में कुछ दिनों पहले से घरों की साफ - सफाई और घरों की लिपाई - पोताई की गई थी । पूरे आयोध्या के हर घर रात को दीपों से जगमगा रहे थे । इस त्योहार हो अंधकार पर प्रकाश का जीत या बुराई पर अच्छाई का त्योहार भी कहा जाता है । इस दिन दीपों की रोशनी से अंधकार लुप्त हो गया था । इसी कारण से हर वर्ष कार्तिक मास के अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है ।

अन्य देशों में दीपावली -


भारत के अलावा अन्य देशों में भी भारतीय लोग निवास करते हैं जो वहां भी दीपावली का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है । नेपाल में इसको खास तरह से मनाया जाता है यहां पशु - पक्षियों को खाना खिलाया जाता है । श्रीलंका तो खुद रामायण से संबंधित है इसलिए वहां कैसे न मनाया जाए । वहां भी दीपावली का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । सुपर पावर देश अमेरिका में भी दीपावली व्हाइट हाउस में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है जहां व्हाइट हाउस को खास तरीके से सजाया जाता है । अमेरिका में दीपावली की शुरुआत 2003 में की गई थी । दुबई की सजावट और आतिशबजी तो लोगों कि आंखों में रौनक ले आती है । इसके अलावा भी बहुत से देशों में धूमधाम से दीपावली मनाई जाती है ।

दीपावली त्यौहार का महत्व -


वैसे तो भारत में बहुत से त्यौहार मनाए जाते हैं पर दीपावली का त्यौहार बाकियों से कुछ खास है । यह केवल भारत में न मनाकर विश्व के विभिन्न देशों जैसे - श्रीलंका , नेपाल ,मलेशिया , ब्रिटेन ,अमेरिका , लंदन , पाकिस्तान में भी मनाया जाता है । यह बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार के रूप में मनाई जाती है ।दीपावली खुशियां लेकर आती है । घर की साफ सफाई की जाती है जो की स्वच्छ भारत में अपना भूमिका अदा करती है । लोग तरह तरह की मिठाई बांटते हैं । नए नए कपड़े खरीदते हैं । प्रभु श्री राम जी की पूजा की जाती है और धन की देवी लक्ष्मी माता का धनतेरस के दिन पूजा की जाती है । घरें दीपो और छोटे छोटे सुंदर बल्बो से सुसज्जित होती हैं । रात को आतिशाजी की जाती है । लोग एक दूसरे से मिलकर दीपावली की बधाई देते हैं ।

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उपसंहार -


दीपावली वैसे तो खुशियों की त्यौहार है पर कुछ ऐसे चीजें हैं जो दीपावली को 100% खुशियों की त्यौहार बनाने में कहीं न कहीं कुछ कमी ला देती है । इस त्यौहार में खुशियों में ग्रहण लाने वाली एक है - जुआ । इस त्यौहार में लोग जुआ खेलते हैं सराब पीते हैं जो कहीं न कहीं लोगो को नुकसान जरूर पहुंचती है । लोग जुआ खेलते हैं ये गलत बात है इस त्योहार को खुशियों के साथ मनानी चाहिए न कि ऐसे । यह हुआ लोगों को डूबा के रख देती है । इस खेल में लोग पैसे तो गवाते हैं साथ ही गहने और घर के कीमती समान को भी बेच देते हैं । इस जुआ से पांडव नहीं बच पाए तो हम तो आम इंसान हैं । जुआ दीपावाली के त्योहार में खुशियों पर ग्रहण है ।
केवल जुआ ही नहीं बल्कि प्रदुषण भी एक कमी ही है । पृथ्वी पर प्रदुषण दिन दिन बढ़ते चली जा रही है जो हमारे अगले आने वाली पीढ़ी के लिए नुसानदायक है । हमे इस खुशियों प्रदूषणरहित मनाना है ऐसे नहीं की भविष्य हमें लोग कोसे की अपनी खुशियों के लिए हम उनकी जिंदगी बर्बाद कर दिए । इसलिए हमे प्रदुषण मुक्त दीपावली माननी चाहिए ।
दुकानों की मीठी मीठी पकवान और मिठाइयां मन में लालच ले आती हैं पर ये मिलावटी मिठाइयां न जाने कितने घर की खुशियां छीन लेती हैं हम सबको एकजुट होकर इन मिलावटी मिठाइयों का विरोध करना चाहिए क्या पता कल हम इसका सामना करना पड़ जाए ।
अनियंत्रित आतिशाजी भी किसी के घर को खुशियों से बेदखल कर सकती है । कभी भी आतिशाजी करते समय साधनी जरूर बरतनी चाहिए क्योंकि कई बार ऐसी घटना सुनने में आती है कि आतिशबाजी के दौरान कई लोग घायल हो जाते है । पथाकों के घर या दुकान में घुस जाने से किसी का बहुत नुकसान हो सकता है इसलिए हमे आतिशबाजी के समय सावधानी जरूर बरतनी चाहिए ।

2018 में दीपावली का त्योहार कब है अथवा कब मनाया जाएगा


सन् 2018 में दीपावली का त्योहार 7 नवंबर 2018 को मनाया जाएगा ।

2018 में दीपावली त्यौहार में क्या है खास -


दीपावली त्यौहार हर साल मनाया जाता है पर इस वर्ष दीपावली में कुछ बदलाव है । कहने का मतलब है कि सब चीजें समान ही होंगी पर इस बार सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आतिशबज़ी पर पूर्ण पाबंदी तो नहीं लेकिन कुछ पाबंदी तो है । आप रात में केवल 8 बजे से लेकर 10 बजे तक ही दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी कर सकेंगे ।

प्रदुषण मुक्त दीपावली कैसे मनाए -


अगर आप भी चाहते हैं कि हमारे आने वाले पीढ़ी खूब रहें और आप प्रदुषण मुक्त दीपावली मनाना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा । वैसे दीपावली में प्रदुषण नहीं हो ऐसा हो नहीं सकता पर ऐसे दीपावली मनाया जा सकता है जिसमें प्रदुषण कम हो । इसमें सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है कि हमें ऐसे पठा को का उपयोग नहीं करना चाहिए जिसके धुआं ज्यादा होता हो । भारत में बहुत से ऐसे chines पटाखे आते हैं जो बहुत ज्यादा प्रदुषण फैलाते हैं । हमे ऐसे पटाखों को त्यागना चाहिए । सुप्रीकोर्ट द्वारा बनाए गए कानून ( केवल 8 बजे से 10 बजे तक ही आतिशाजी करना है ) का पालन करके कम प्रदूषण में दीपावली मनाया जा सकता है ।

निष्कर्ष -


दीपावली एक खुशियों का त्यौहार है । इस त्यौहार को अंधकार का अंत भी कहा जाता है । त्योहार का अर्थ होता है एक तरह की खुशी जो सारे गम भुलाकर हमें खुशियां देती है । आपस में भाईचारा बढ़ाने की प्रेरणा देती है । दीपाली तो अक्षरों से मिलकर बनी है दीप + आवली मतलब कि दीपों की कतार । इस दिन इसीलिए दीपों की कतार हर घर लगाई जाती है ।

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2 Responses to "दीपावली पर निबंध |दीपावली क्यों मनाते हैं | दीपावली कैसे मनाएं"

  1. Ajay kumar gupta31 October 2018 at 08:55

    बहुत ही बेहतरीन लेख आपने दीवाली के ऊपर share किये हैं। धन्यवाद इस बहुत ही best लेख को शेयर करने के लिए…

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  2. Theknowledgeprov31 October 2018 at 16:03

    धन्यवाद भाई आप हमारी साइट विजिट करते रहिए

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